'संगठन में शक्ति है!'
'संगठन में शक्ति है।' इस मूल मंत्र को समझे और क्रियांवित करे। संगठन से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। बिना संगठन के कोई भी देश व समाज सुचारू रूप से नहीं चल सकता है। संगठन ही समाज का दीपक है- संगठन ही शांति का खजाना है। संगठन ही सर्वोत्कृषष्ट शक्ति है। संगठन ही समाजोत्थान का आधर है। संगठन बिना समाज का उत्थान संभव नहीं। संगठन के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता, क्योंकि संगठन ही समाज एवं देश के लिए अमोघ शक्ति है, किन्तु विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है। विघटन समाज को तोड़ता है और संगठन व्यक्ति को जोड़ता है। संगठन समाज एवं देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा देता है। आपसी फूट एवं समाज का विनाश कर देती है। धागा यदि संगठित होकर एक जाए तो वह हाथी जैसे शक्तिशाली जानवर को भी बांध सकता है, किन्तु वे धागे यदि अलग-अलग रहें तो वे एक तृण को भी बंधने में असमर्थ होते हैं।