उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश संख्या 1083/V-VII-537, दिनांकित अगस्त 27, 1928 एवं 99/VII-37, दिनांकित जनवरी 22, 1929 द्वारा 
विधिवत् मान्यता-प्राप्त तथा उत्तर प्रदेश (सेवा संघ की मान्यता) नियमावली, 1979 के अन्तर्गत जारी अधिसूचना संख्या 2917/XLIII-I-ER-79
दिनांक जून 02, 1979 व अधिसूचना संख्या दिनांक मार्च 27, 1981 द्वारा यथासंषोधित के द्वारा उत्तर प्रदेश का द्वारा मान्यता प्राप्त

अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश

" सत्यमेव जयते "

हमारे संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी

संघ के प्रति पूर्ण निष्ठावान, ईमानदार एवं कर्मचारी-हित के लिए सदैव तत्पर

डॉ. नृपेन्द्र सिंह

प्रांतीय अध्यक्ष
वाद लिपिक,
न्यायालय सिविल जज, (सी. डि.),
जनपद न्यायालय, बदायूँ 

श्री अनिल सिंह

संरक्षक
पेशकार,
न्यायालय अपर जिला जज-०५,
जनपद न्यायालय, बदायूँ

श्री नरेन्द्र विक्रम

महासचिव
लेखा लिपिक,
जनपद न्यायालय,
श्रावस्ती

हमारा लक्ष्य

"कर्मचारीगण के हितों का सदैव संरक्षण करना"

'संगठन में शक्ति है!'

'संगठन में शक्ति है।' इस मूल मंत्र को समझे और क्रियांवित करे। संगठन से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। बिना संगठन के कोई भी देश व समाज सुचारू रूप से नहीं चल सकता है। संगठन ही समाज का दीपक है- संगठन ही शांति का खजाना है। संगठन ही सर्वोत्कृषष्ट शक्ति है। संगठन ही समाजोत्थान का आधर है। संगठन बिना समाज का उत्थान संभव नहीं। संगठन के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता, क्योंकि संगठन ही समाज एवं देश के लिए अमोघ शक्ति है, किन्तु विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है। विघटन समाज को तोड़ता है और संगठन व्यक्ति को जोड़ता है। संगठन समाज एवं देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा देता है। आपसी फूट एवं समाज का विनाश कर देती है। धागा यदि संगठित होकर एक जाए तो वह हाथी जैसे शक्तिशाली जानवर को भी बांध सकता है, किन्तु वे धागे यदि अलग-अलग रहें तो वे एक तृण को भी बंधने में असमर्थ होते हैं।

संपर्क सूत्र

मुख्यालय : जनपद न्यायालय, बदायूँ
मोबाइल : 9412462719, 9259049509
कैम्प कार्यालय : जनपद न्यायालय, श्रावस्ती
मोबाइल : 9415572022, 7398372302